उन्हें बदलना था वो बदल गए
हालात तो नहीं थें जो बत से बत्तर हो जाते लेकिन फिर भी संभल जाते
वो लोग थे जो रौशनी की तलाश में चल पड़े थे
और यहां तुम हो जो तिनकों से उजाले करने पे अड़े हो
-देवेन पहिनकर
One response to “यादोंके उजाले”
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bhot hard bhot hard!!
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